Sunday, July 31, 2011
Thursday, July 28, 2011
गजल
गजल
एक्लै पारी छोडी गयौ
बाँचा पनि तोडी गयौ
आफ्नै भनी सम्झी रहेँ
अन्तै नाता जोडी गयौ
विश्वासको फूल रोपेँ
जरै देखि गोडी गयौ
किनी दिएँ घुम्टो मैले
अर्कै सँग ओढी गयौ
युगौं युग साथ भन्थ्यौ
यात्रा किन मोडी गयौ ?
अज्ञात पाल्पाली
एक्लै पारी छोडी गयौ
बाँचा पनि तोडी गयौ
आफ्नै भनी सम्झी रहेँ
अन्तै नाता जोडी गयौ
विश्वासको फूल रोपेँ
जरै देखि गोडी गयौ
किनी दिएँ घुम्टो मैले
अर्कै सँग ओढी गयौ
युगौं युग साथ भन्थ्यौ
यात्रा किन मोडी गयौ ?
अज्ञात पाल्पाली
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